Wednesday, 27 June 2012

सऽमधि एला बनि-ठनि कऽ / मैथिली गीत -डहकन



सऽमधि एला बनि-ठनि कऽ





सऽमधि एला बनि - ठनि कऽ ।
धोती - कुरता   पहिरि   कऽ ।
                                 एला डहकन  सुनऽ बेटाके बियाहमे |


हम  सब   करै  छी   पुछारि ।
बाजू  गीत  सुनब  कि  गारि ।
                                 आ कि उलहन सूनब बेटाके बियाहमे |



ककरा  सँ माँगि कऽ धोती पहिरलौं,
ककरा   सँ   लेलियै    कुरता ।
ककरा सँ लेलियै पाग आ मिरजइ,
ककरा   सँ   लेलियै    डोपटा ।

के..हेन अछि छोटका ख....दान ।*
घिने..लौं  मुइलो  बापक  नाम ।
                                तेँ तँ उलहन दै छी बेटाके बियाहमे |


लाजो  ने  भेल जे टाका गनेलियै ।
बेटाकेँ बेचि  कऽ  खेतो किनलियै ।

कहू  तँ  कारी - चून  लगा  दी ।
अहाँ  केँ  गदहा  पर  बैसा  दी ।
                                गामक परिछन करब बेटाके बियाहमे |


पएरमे  बेमाए  अछि   फाटल,
तँ  कोना कऽ एलियै यौ बूढ़ा ।
दाँत  अछि  एको  ने  बाँचल,
तँ  कोना   चिबेलियै   चूड़ा ।

अजगुत    लऽगैए    गे   दाइ !

बुढ़बा  टुप - टुप  खेने  जाइ !
                              बुढ़बा मारल जेतै बेटाके बियाहमे |





 छोटका ख....दान = छोट / निकृष्ट विचारधारा बला खनदान = एहि पाँतिक जातिगत वर्गीकरण सँ कोनहु लेन – देन नञि थिक




( रचना : १९७६ : शशिकान्तजी - सुधाकान्तजी द्वारा विभिन्न मंच पर प्रस्तुत कयल गेल )

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